Day 16 | आसमां

चाँद, सूरज, या आसमां को चुनू?
ख़ास, ज़रूरी, या आशना को चुनू?
या की मैं,
ख़ाब की उलझी डोरी से,
कांच का इक पुतला बुन,
मोहब्बत बेइंतेहा को चुनू?

Day 15 | दिल/लिखना

क्या लिखना है, क्या कहना है,
जो होना है, वो सहना है|
दिल जिद्दी है, मानेगा नहीं,
की इसने,
जो छूट गया, वो थामा है,
जो खो गया, वो पाना है|

Day 13 | आग/जलना

बस एक बार और,
उस याद की सीड़ी से फिसलना है|
बस एक बार और,
उस प्यार की आग में जलना है|

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